मैट्रªो की सवारी भाग-3
दोस्तों काफी दिनों से मैंने आपसे अपने मै मैट्रªो के सवारी के बाबत बातें शेयर नहीं की। अरे क्या बताउं हर दिन का मै मैट्रªो का सफर अलग ही रोमांच लेकर आता है। कल रात को एक फंक्शन में गई थी देर से आना हुआ। थकान लग रही थी और नींद भी पूरी नहीं हुई थी सो आॅफिस आने का बिल्कुल भी मन नहीं था, पर क्या करें जी जब आप कहीं काम कर लेते हैं, तो चाहकर भी आराम नहीं कर पातें अपने लिए छुट्टियां लेना बड़ा ओखा लगता है खासकर तब जब आपके छोटे बच्चे हों। मन मसोसकर रहना पड़ जाता है। तो मरता क्या न करता के हालात में हम भी बेमन से उठकर आॅफिस के लिए तैयार हो गये और चल पड़े व्यस्तता भरे दिन के लिए। जिसकी शुरुआत मेरी प्यारी मै मैट्रªो से होती है। जैसे ही घर की सीढि़यां उतरे वैसे ही थकान भी दूर हो गई। मन ललचने लगा कान लगाकर मै मैट्रªो में होने वाली कानाफूसी सुनने को।
सुस्ती के मारे घर से ही देर से निकली थी। जैसे ही मै मैट्रªो स्टेशन पर पहुंची मेरी आंखें वहां खड़े लोगों को देखकर चैड़ी हो गई। ध्यान से देखने लगी कि किस कोने में जाकर खड़ी हाउं जहां कुछ मजेदार बातें सुनने को मिले। थोड़ा आगे बढ़कर एक जोड़े के पास खड़ी हो गई और कनखियों से उनकी हरकतों को देखने लगी। लड़का कभी धीरे से लड़की का हाथ दबा देता तो कभी उसकी बालों को खींचने लगता और धीरे से उससे कुछ कहता और लड़की मुसकराने लगती। अभी मैं उनकी बातों में रस लेने ही लगी थी कि तभी मै मैट्रªो आ गई और मैं धक्का-मुक्की करते उसमें सवार हो गई। आगे-पीछे देखने लगी कि शायद कहीं कोई सीट मिल जाये । तबीयत ठीक ना होने की वजह से शायद मेरे चेहरे पर थोड़ी थकान लग रही थी शायद इसी देखकर एक भली लड़की अपनी सीट से खड़ी हो गई मैं उसका धन्यवाद कहकर बैठ गई। सोचा टाइमपास करने के लिए कैंडीक्रश के एक दो लेवल पार कर लूं मोबाइल बैग से निकालने ही लगी थी कि तभी देखा कि वही जोड़ा मेरे सामने खड़ा हो गया उनकी मुस्कान ने फिर मेरा ध्यान खींच लिया और मैंने अपने कान उनकी बातों पर लगा दिये उनकी प्यारी बातें सुनकर अच्छा लग रहा था। फिर उनको छोड़कर मुझे उतरना पड़ा क्योंकि मुझे दूसरी मै मैट्रªो बदलनी थी।
लाजपत नगर की मैट्रªो पकड़ने के लिए दूसरे प्लेटफाॅर्म पर पहुंची। स्टेयर्स से उतर रही थी कि उंची हील पहनी एक भारी-भरकम मोहतरमा से टकरा गयीं। मैं गिरते-गिरते बची, लेकिन उन्होंने सौरी तक कहने की जरूरत नहीं पहुंची। हाथ में मोबाइल लिये ना जाने किससे इतना बेसुध होकर व्हाटसएप पर चैट कर रही थीं कि उन्हें किसी के गिरने मरने की चिंता भी नहीं थी। मन तो आया कि मुंह पर एक झापड़ रसीद कर दूं फिर सोचा जाने दो अभी आगे बढ़ी ही थी कि कानों में एक सुरीली और खनकती सी आवाज पड़ी अरे जाओ ज्यादा बनो नहीं मैंने मुड़कर देखा काॅलेज की कोई लड़की थी जो कि अपने ब्वाॅयफ्रेंड से गुटरगूं कर रही थी मै मैट्रªो आई मैं उस में चढ़ गई साथ में वो भी चढ़ गई। अपनी आदत से परेशान मेरे कान फिर सतर्क हो गये। वो हंस-हंसकर बात कर रही थी बातों बातों में आई लव यू और पुच पुच करती किस की आवाज भी आ रही थी। सबसे बेपरवाह कौन क्या कहेगा क्या सोच रहा होगा से बेपरवाह अपनी बात करने में बिजी थी। मैंने मन में सोचा कि जमाना कितना बदल गया है सच में सभी बहुत बोल्ड हो गये हैं। पहले की तरह बातें छिपाने का नहीं बल्कि अपनी फीलिंग्स जाहिर करने का टाइम आ गया है चलो अच्छा है...
चलते हैं आॅफिस पहंचने का समय हो गया है फिर कभी गुफ्तगू करेंगे आपसे


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