हार नहीं मानूंगी
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खुद से ये वादा है मेरा
हार नहीं मानूंगी
ऐ जिंदगी
तेरी हर ताल से
क्दम से कदम मिला के
दृढ़ता से चलूंगी
मेरे मन में है
उमंगों का
और अनगिनत भावों का विचारों का
सोता सा बहता
जिसकी धार से सराबोर कर दूंगी
धरा को
नामुमकिन को
मुमकिन करने का
साहस है मुझमें
सच कहती हूं
हार नहीं मानूंगी
कितनी भी कठिन हो राहें
हर राह पर
बढ़ती ही जाउंगी
खुद से खुद का वादा है
जीवन में हर दिन
कुछ न कुछ
नवसृजन करती रहूंगी
पुरानी रूढि़यो के सहारे ही
जीवन को ना जियूंगी मैं
हार नहीं मानूंगी...

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