Thursday, March 26, 2015


                        दुनिया के पहले ब्लाॅगर की कहानी


जस्टिन हाल
मैंने यूएस प्रेसिडेंट्स डे 2015 का दिन अंतर्राष्टरीय कैनाबिस व्यापार सम्मेलन में बिताया। वहां जाकर मैं किसी भी तरह का कोई वीडियों बनाने को उत्सुक नहीं था। मैं तो बस वहां पर काॅन्फ्रेंस अटैंड करने के लिए गया था। लेकिन बहुत सारे लोग ऐसे थे, जो वहां होने-वाली एक-एक पल की घटना के बारे में जानने को उत्सुक थे। उनकी इसी जिज्ञासा को शांत करने के लिए मैंने सोचा कि कैनाबिस बिजनेस काॅन्फरेंस को अपने तरीके से वीडियों फाॅर्म में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया, ताकि मैं लोगों को यह बता सकूं कि वहां पर होता क्या है।
                      जस्टिन हाल 25, फरवरी 20015

जस्टिन हाल ने 1994 में सबकुछ आॅन लाइन साझा करने की एक ऐसी तकनीकी खोजी, जिसके तहत वो अपने जीवन में घटित सभी बातों को चाहे वो उनकी निजि जिंदगी से जुड़ी हो या फिर जो कुछ वो अपने आस-पास देखते थे उसे इंटरनेट पर साझा करने लगेे। उस समय हाल काॅलेज में पढ़ने वाला 19 साल का युवा था जो कि दिनभर की हर घटना को अपनी पर्सनल वेबसाइट पर शेयर करता था। उस समय तक किसी को भी यह नहीं पता था जस्टिन की यह लत एक दिन उसे बेहद फेमस बना देगी और करोड़ों लोगों को लुभाने का कारण बन जायेगी। 

सबसे अलग सबसे जुदा

गोरा और दुबला-पतला हाल के अंदर ऐसा हुनर था कि वो अपनी बात को बेबाक तरीके से लिख सके और ूूूण्सपदोण्दमज पर शेयर कर सके। जब हाल ने 1994 में अपनी बातें लिखने की शुरुआत की तो उस समय वो 60 के दशक के किसी बच्चे के लेखन की तरह था फिर धीरे-धीरे उसमें सुधार होता गया और पढ़ने वाले को उसकी हर पोस्ट में इटरेस्ट आने लगा। अमेरिकन जर्नलिस्ट और व्यवसायी जस्टिन ने सबसे पहले अपने लिंक पर अपनी पर्सनल डायरी पोस्ट करनी शुरु की, जिससे लोग उसे देख और पढ़ सकें और उस पर अपने कमेंट्स भी लिख सकें। उनके द्वारा पोस्ट की गई चीजें जस्टिन्स लिंक्स फ्राॅम द अंडरग्राउंड के नाम से प्रसिद्ध हुआ। बाद में इस ई-डायरी को वेब लाॅग के नाम से पहचान मिली। ईटनेट की दुनिया में सभी कुछ शाॅर्ट और क्रिस्प होता है, इसलिए वेबलाॅग बाद में ब्लाॅग बन गया। जस्टिन ब्लाॅगर के तौर पर खासे फेमस हुए। ब्लाॅगिंग की शुरुआत कर जस्टिन ने लोगों को सोशल मीडिया पर अपनी बातें स्पष्ट शब्दों में कहने के लिए एक नया प्लेटफाॅर्म दिया। 

यूं लगा लगा चस्का

जब जस्टिन काॅलेज में पढ़ रहे थे उसी समय उनके मन में इंटरनेट के प्रति लगाव बढ़ने लगा। उन्हें यह बात बहुत अच्छी लगती थी कि लोग लिंक से बहुत जल्दी जुड़ते थे। इंटनेट सर्फिंग करने के साथ-साथ जस्टिन खूब लिखते थे। अपनी बातों को कलमबद्ध करते समय जस्टिन अपने साथ घटी किसी भी घटना से लेकर अपने आस-पास घटित होने वाली चीजों को भी बखूबी लिखते थे। उनकी इसी खूबी ने उन्हें दुनिया का पहला ब्लाॅगर बना दिया। उनकी ब्लाॅग इतनी ज्यादा सफल हुई कि प्रतिदिन उस पर काफी सारे  लोग विजिट करते थे। चूंकि ब्लाॅग पर जस्टिन सभी चीजें पोस्ट करते थे यहां तक कि उन्होंने अपनी निजी बातों के साथ-साथ अपनी कुछ न्यूड पिक्चर्स भी अपनी ब्लाॅग पर डाल दी थी, जिसकी वजह से उनकी ब्लाॅग को सेक्स साइट समझ कर एक दिन उनकी ब्लाॅग पर 2500 से ज्यादा लोगों ने बिजिट किया। जस्टिन को लिखने के लिए उनके मित्र दस्तोवस्की ने प्रेरित किया, जो कि मैक्सिको के काॅलेज सेंट जाॅन्स काॅलेज में एक अंडग्राउंड न्यूजपेपर निकालता था। अपनी 19 साल की उम्र में जस्टिन जिस तरह की चीजें लिखते थे उसके लिए अंडरग्राउंड न्यूजपेपर पर्फेक्ट था। 

आॅनलाइन गेम के हैं दीवानें 
जस्टिन हाल

काॅलेज के जमाने से ही जस्टिन सोशल और मोबाइल गेम्स के लिए क्रेजी रहे हैं। काॅलेज के दिनों में उनका आॅनलाइन गेम्स के प्रति पेशन बढ़ता रहा। इसके चलते 2006 में उन्होंने गेम्स आॅनलाइन गेम्स की कंपनी से जुड़ गये जहां जस्टिन और उनकी टीम के सदस्यों ने पीएमओजी नेटहरनेट गेम बनायी जो कि वेब सर्फिंग के दौरान खेलते हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने फेसबुक और फायर फाॅक्स के लिए भी गेम्स बनाया। इसके बाद जस्टिन ने 2010 में टच पेट्स कैट्स के नाम से खुद की गेम्स कंपनी स्टार्ट की। उनके द्वारा बनाये गये गेम्स का इस्तेमाल आइफोन्स में किया जाता है। 

बदल गयी दुनिया

जब जस्टिन ने 19 साल की उम्र में पहली बार अपनी पर्सनल फीलिंग्स को आॅनलाइन शेयर किया तो उनकी लाइफ में काफी बदलाव आये। उनके लिए यह एब बड़ी चुनौती थी क्योंकि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत बातों को सार्वजनिक कर दिया था। इस संबंध में उनके पास उनके पास लोगों के मेल्स आते थे, जिसमें तरह-तरह की बातें लिखी होती थीं। रिलेशन में बंधने के बाद जस्टिन ने ब्लाॅग पर अपनी व्यक्त्गित चीजों को साझा करना बंद कर दिया। ब्लाॅग लिखने के साथ-साथ अब जस्टिन साॅफ्टवेयर प्रोड्यूसर के तौर पर सैन फैंसिस्को में काम कर रहे हैं। 

प्रभावित किया

जब जस्टिन ने पहली बार पहले ब्राउजर मोजैक को देखा, तो वे बेहद एक्साइटेड हुए। इसे देखने के बाद उन्हें लगा कि यह बड़ी फैंटास्टिक जगह है, जहां पर आप दूसरे लोगों के साथ अपनी बातों को साझा कर सकते हैं और उनके साथ संपर्क बना सकते हैं।

Wednesday, March 25, 2015


अक्सर ये सोचती हूं मैं...



अलसाई सी रात ठहर क्यों नहीं जाती
उस क्षण
जब
आकाश में तारे टिमटिमाते हैं
और चांद निकलता है अपने पूरे रूप में
बारिश की बूंदें थम क्यों नहीं जाती हैं
उस क्षण
जब
आसमान में छाए होते हैं
काले बादल
और पेड़ों पर चहचहाते पक्षी
दुबके होते हैं अपने घोसलों में
और
मम्मी तल रही होती हैं
गरम पकौड़े
सूरज की किरणें
रुक क्यों नहीं जाती हैं
उस क्षण
जब दिसंबर की ठंड से किटकिटाते हैं दांत
अक्सर ये सोचती हूं मैं
क्यों कर वो एहसास
चिरस्थायी नहीं हो पाता
जो मन को लुभाता है
फिर सोचती हूं
शायद यही प्रकृति का नियम है
तभी तो
रात ठहरती नहीं
सूरज रुकता नहीं
चांद निकलता नहीं अमावश को
और
बारिश की बूदें थमती नहीं...

Tuesday, March 17, 2015

झूठा घमंड ना कीजो कोय


बहुत देर से सुजाता अपनी बहू अनुराधा की राह देख रही थीं, उसे घर से गए काफी देर हो गई थी। सुजाता को इस बात की ंिचंता नहीं थी कि अनुराधा ठीक-ठाक होगी कि नहीं उन्हें तो इस बात की ंिचंता थी की सारा घर अस्त-व्यस्त पड़ा हुआ था। जब दोपहर तक अनुराधा वापस नहीं आई, तो सुजाता उसे कोसते हुए घर का काम निपटाने लगीं। सब्जी काटते हुए वे तेजी से बड़बड़ा भी रही थीं। दोपहर का समय हो गया लेकिन महारानी जी का कुछ पता नहीं। घर आएं तो अच्छी तरह से खबर लेती हूं। जरा-सी देर को बाहर जाने की इजाजत क्या दे दी मैडम घर का रास्ता ही भूल गईं।
दोपहर का खाना बनाने के बाद वो गुस्से से आंगन से दरवाजे के चक्कर काट रही थीं कि तभी घंटी बजी। दरवाजा खोला, तो अनुराधा को सामने खड़ा देखकर वे अपना आपा खो बैठीं और उसे अंदर आने का मौका दिये बिना ही उस पर झपट पड़ीं। ये टाइम है घर आने का? जब देखो तब बाहर घूमने का बहाना चाहिए घर के काम काज से कोई सरोकार नहीं। आने दो मन्नत को तब तुम्हारे पर कतरवाती हूं।
सासू मां का रौद्र रूप देखकर अनुराधा घबरा गई थी वो धीरे से बोली, मां जी मुझे अंदर तो आने दीजिए फिर बताती हूं कि मुझे देर क्यों हो गई?

उसकी बात बीच में काटते हुए सुजाता चीखने लगीं, रहने दो बहाना बनाने की जरूरत नहीं। क्या मैं जानती नहीं हूं तुम्हें ना जाने किससे मिलने जाती हो मौका मिलते ही।
बड़ी देर से अनुराधा अपनी सास की बात चुपचाप सुन रही थी, पर जब वो उसके मां-बाप को कोसने के साथ-साथ उसके चरित्र पर लांछन लगाने लगीं, तो उसे बरदाश्त नहीं हुआ और वो गुस्से से फट पड़ी। आप समझती क्या हैं अपेन आपको? जब देखो तब टोकाटाकी तंग आ गई हूं मैं इस रोज-रोज की किचकिच से। आज तो आपने हद ही कर दी। कहे देती हूं मैं आपसे इस तरह की ओछी बातें मुझे पसंद नहीं। आइंदा मुझसे इस तरह की बात मत कीजियेगा। कहते हुए अनुराधा रोते हुए अपने कमरे में चली गयी।
सुजाता अवाक सी एकटक सुजाता को जाते हुए देखती रह गईं उसका यह रूप उनके लिए एकदम नया था। वो सोचने लगीं क्या यह वही अनुराधा है, जिसे वो गाय समझकर अपने बेटे मन्नत के लिए यह सोचकर ब्याह लायी थीं कि मामा-मामी के रहमोकरम पर पली बिन मां-बाप की बच्ची उनकेे कहे में रहेगी।
अनुराधा पर उन्होंने खूब अंकुश लगाकर रखा। सुजाता ने ना कभी उसे मन का खाने दिया ना पहनने। इतना ही नहीं मन्नत को भी उन्होंने उसके ज्यादा करीब नहीं होने दिया। उन्हें हमेशा इस बात का डर लगा रहता था कि अगर उन्होंने अनुराधा को ज्यादा ढील दी, तो वह उनके बेटे पर अपना कब्जा कर लेगी और वो मात्र घर की नौकरानी बनकर रह जायेंगी।
मन्नत के बारे में सोचते हुए एक क्षण को उनके चेहरे पर मुस्कराहट तैर गई फिर दूसरे ही क्षण उनकी आंखें डबडबा गई। तीन बेटियों के बाद जनमा मन्नत उनकी आंखों का तारा था। जब उन्होंने उसे जनम दिया तो उनके पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। पति की रोबदाब वाली नौकरी और चांद सा बेटा। यही तो चाहती थीं वह हमेशा से। पति की कमाई का घमंड तो उन्हें शुरू से ही था अब बेटा पैदा हो जाने के बाद उनका दिमाग सातवें आसमान पर पहुंच गया। तीन बेटियों के जनम ने उनके चेहरे की चमक को थोड़ा कम कर दिया था। लेकिन मन्नत की आमद ने उनके अहं को बढ़ा दिया। अब वे अपनी सास को भी बात-बात पर लताड़ने लगीं।
सुजाता के तेज व्यवहार से सभी दुखी थे, लेकिन घर की शांति बनाए रखने के लिए कोई कुछ नहीं बोलता था।
सास तो कभी उनके आगे जुबान नहीं खोलती थीं वो हमेशा यही सोचतीं बेटा खुश है, तो फिर मैं क्यों घर में बेकार का कलेश करुं। उनकी इस सोच को सुजाता उनकी कमजोरी समझकर किसी के भी सामने उनका अपमान करने से नहीं चूकतीं।
मन्नत के जनम के बाद पड़ोस की राधा काकी बोल ही पड़ीं, अरी सुजाता इतना ना इतरा, तेरी सास ने भी बेटा जना था। देख ले बुढ़ापे में कितना सुख भोग रही हैं तुझे भी वही मिलेगा, जो तेरी सास को मिल रहा है। फिर तेरा बेटा, तो तेतर है। कहते हैं तेतर बेटी राज रजावे और तेतर बेटा भीख मंगावे... अभी भी समय है चेत जा बहुरिया अपनी सास का दि लना दुखा।
राध काकी की बात सुजाता को बड़ी कड़वी लगी, गुस्से में आकर वो राधा काकी का अपमान करने से ना चूकीं। इस घटना के बाद से मुहल्ले के लोग सुजाता से कट गए। नाते-रिश्तेदार तो पहले ही मुंह मोड़ चुके थे। 
कहते हैं ना घमंड किसी का नहीं टिकता। मां मुंहसे भले की कुछ ना कहे पर दिल दुखता है, तो बद्दुआ निकल ही जाती है। अभी मन्नत पांच बरस का भी नहीं हुआ था कि सुजाता के पति अजीत ने आंखें मूंद लीं। उन्हें अपनी मां की मौत का सदमा बरदाश्त नहीं हुआ। सुजाता के कलेश के मारे वो चाहकर भी अपनी मां उचित इलाज नहीं करा पाएं यही बात  उन्हें सालती रही और मां के मरने के महीेन भर बाद ही वो भी चल बसे।
पति के जाने के बाद सुजाता कुछ दिनों तक तो सुन्न सी पड़ी रही कुछ बोलती नहीं थी बस एकटक जहां देखतीं तो देखती ही रह जातीं। पड़ोसियों ने उन्हें हिम्मत दिलाई। अपनी बेटियों और नन्हे मन्नत का मुंह देखकर उन्होंने खुद को संभाला।

दिन चाहे सुख के हों या दुख के बीत ही जाते हैं इसी तरह से सुजाका के दिन भी बीतने लगे। धीरे-धीरे समय गुजरता गया बेटियां ब्याहकर अपने घर चल गईं और मन्नत का भी ब्याह हे गया। मन्नत की उंची नौकरी ने सुजाता को फिर से मगरूर बना दिया। ब्याह के बाद उन्होंने एक दिन भी सुजाता को सुख से नहीं रहने दिया। बात-बात पर मन्नत से उसकी शिकायत करतीं। जब मन्नत उसे डांटता तो उन्हें बड़ी खुशी होती।
आज भी मन्नत जैसे ही धर में घुसा, वो उसके सामने अनुराधा की शिकायत की पोटली खोलकर बैठ गयीं। मन्नत चुपचाप उनकी बात सुनता रहा। फिर बोला, मां अनुराधा बहुत बुरी है ना?
सुजाता बोल पड़ीं, हां बेटा पता नहीं मेरे ही अक्ल पर पत्थर पड़ा था, जो मैं उसे अपनी बहू बनाकर ले आयी।
मां बी बात सुनकर मन्नत सधे हुए लहजे में बोला, ठीक है मां फिर वो हमेशा-हमेशा के लिए इस घर से चली जाएगी।
सुजाता हैरानी से बोलीं, क्या तू सच कह रहा है बेटा?
हां, मां मैं सच कह रहा हूं यह आपका घर है। यहां आपकी ही मर्जी चलेगी कहते हुए मन्नत अपने कमरे में चला गया।
सुजाता खुशी से बौरा-सी गयीं। वो सोचने लगीं अभी भी मेरा बेटा मेरी बात मानता है उसके लिए मुझसे बढ़कर कुछ नहीं।
सुजाता की खुशियों में खलल डालते हुए मन्नत बोला, मां हम जा रहे हैं।
मन्नत की बात सुनकर सुजाता हैरानी से उसका चेहरा देखने लगीं और अचकचाकर बोलीं, कहां?
मन्नत धीरे से बोला, आपसे और आपके घर से बहुत दूर जहां अनुराधा और मैं प्यार से रह सकें। शायद आपको सुनकर अच्छा ना लगे, मां मैं अनुराधा से बेहद प्यार करता हूं। भले ही आपने कभी हम दोनों को करीब नहीं होने दिया, लेकिन सच यही है कि अनुराधा की अच्छाईयों ने कब मुझे उसके इतना करीब ला दिया मुझे समण् ही नहीं आया। मां ना तो आप एक अच्छी बन पायीं और ना ही अच्छी सास। काश आप रिश्तों की गहराई को समझ पातीं। मां बनकर भी आप प्यार की कोमल भावनाओं से अछूती ही रह गईं। 
कुछ देर सुजाता भौचक्की-सी मन्नत को देखती रहीं फिर हकलाते हुए बोलीं, तू क्या कह रहा है मैं कुछ समझी नहीं? तू अनुराधा के लिए अपनी मां को छोड़कर जा रहा है?
मैं जो भी कह रहा हूं आप अच्छी तरह से समझ रही हैं मां अभी भी आपको मेरी चिंता नहीं है बस फिक्र है, तो इस बात की कि हमारे चले जाने से आपकी गरदन नीची होगी। मां हरदम घर में आपने अपनी हुकूमत चलाई है, पर अब और नहीं। मैं आपकी मनमानी नहींसह सकता। मैंने दादी को इस घर में घुट-घुट कर जीते देखा है, लेकिन मैं अपनी बीवी के साथ ऐसा नहीं होने दूंगा कहते हुए मन्नत अनुराधा का हाथ पकड़कर घर की दहलीज लांघ गया।
सुजाता भरी-भरी आंखों से मन्नत को जाते हुए देखती रहीं। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनका लाडला बेटा उन्हें छोड़कर चला जाएगा। कई दिन तक सुजाता मन्नत की राह देखती रहीं पर वह वापस नहीं आया। अब रह-रहकर सुजाता को मन्नत के जनम के समय कही गयी राधा काकी की बात, तेतर बेटा... याद आने लगी। उनका गुरूर टूट गय था। अकेला घर काटने को दौड़ रहा था। कभी उनकी आंखों के सामने अपनी सास का दयनीय चेहरा आ जाता तो कभी अनुराधा का उदास चेहरा। सुजाता अपने आप से पूछने लगीं क्या सच ही तेतर बेटा दुख ही देता है। गलती क्या मन्नत के तेतर होने की हैया फिर मेरे गलत व्यवहार की। अपने सवाल का जवाब उन्हें खुद ही मिल गया। अपने किये का विचार करते हुए उनकी आंख लग गई। अगली सुबह जब वह उठीं, तो खुद को काफी हल्का महसूस किया। नहाने के बाद पहली बार सास की तसवीर के आगे हाथ जोड़कर खड़ी हो गईं और बुदबुदाने लगीं मां जी मुझे माफ कर दीजिए। अपनी सास की तस्वीर के आगे दिया जलाने के बाद उन्होंने अपनी सास के नाम पर भूखों को खाना खिलाया और फिर सुजाता अपने रूठे बेटे मन्नत और अपनी बहू अनुराधा को घर लौटाने के लिए चल पड़ीं। 

Tuesday, March 10, 2015

Khush rahne ko jaroori hai pyar

खुश रहने को जरूरी है प्यार

किसी भी संबंध मं खुशी का एहसास तभी समाहित हो सकता है, जब उसमें प्यार का समावेश हो। हमें अपने जीवनसाथी से अक्सर ही शिकायत रहती है। शायद ही कोई ऐसा पल होता हो, जो बिना किसी बहस के बीत जाये। अगर आप भी अपने साथी के साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं, तो इस आदत को अपने दिमाग की स्लेट से मिटा दें, फिर  देखिये कैसे आपके जीवन में खुशियां बसेरा करती हैं।

आज हरीश बहुत अच्छे मूड में था, सोच रहा था कि आज नेहा को शाॅपिंग पर ले जाउंगा बहुत दिन हो गये  मूवी देखे तो आज दोनों मूवी देखेंगे और डिनर करके वापस आयेंगे यही सब सोचकर उसने नेहा को फोन किया नेहा ने फोन उठाया और हरीश के यह बोलने पर कि आज  दोपहर में तैयार रहना मैं घर जल्दी आउंगा फिर हम शाॅपिंग पर जायेंगे और मूवी देखने के बाद डिनर करके ही वापस घर आयेंगे। हरीश का फोन सुनकर नेहा के मुंह से निकल गया कमाल है आज आपको मेरे लिए टाइम मिल गया। हैरानी की बात है आपके बाॅस ने आपको छुटृटी दे दी, वैसे तो जब कभी मैं बोलती हूं तो आपके पास टाइम नहीं होता है मेरे लिए। नेहा की बात सुनकर हरीश का अच्छा खासा मूड खराब हो गया हालांकि दोनों ने एकसाथ काफी समय बिताया लेकिन हरीश का मूड खराब ही रहा


नेहा की तरह बहुत साी पत्नियां ऐसी होती हैं, जो पति अगर उन्हें समय ना दे तो तानाकशी करती हैं और समय मिल भी गया तो अपनी जली-कटी बातों से उसे खराब करने से बाज नहीं आती हैं। सच तो यह है कि जब आप किसी से प्यार करते हैं तो यह मायने नहीं रखता है कि आपने अपने साथी के साथ कितना समय बिताया उस समय तो यही मायने रखता है कि आप दोनों ने जो भी समय बिताया वह कितना अच्छा बीता अगर आपने अपने समय को एकदूसरे से उलझने में ही बिता दिया तो फिर यह मानकर चलिए कि अगर आपका एटिटयूड यही रहेगा तो आप दोनों कभी भी खुश नहीं रह पायेंगे क्योंकि खुश रहने की पहली शर्त यह है कि आप अपने साथी की भावनाओं का ध्यान रखें कोई ऐसा काम ना करें, जिससे आपका साथी हर्ट हो।

एकदूसरे की भावनाओं का रखें ख्याल

खुशहाल जीवन के लिए यह बेहद जरूरी है कि आप दोनों एकदूसरी की भावनाओं की कद्र करें और एकदूसरे की पसंद ना पसंद का ध्यान रखें। यह सिर्फ पत्नी की ही जिम्मेदारी नहीं है पति के लिए भी यह बात उतना ही मायने रखती है जितना पत्नी के लिए। वैसे भी कहा जाता है कि पति-पत्नी का संबंध बेहद संवेदनशील होता है दोनों को एक गाड़ी के दो पहियों की तरह माना गया है, जिस तरह से अगर एक पहिये में हवा कम हो गयी या फिर वह पंक्चर हो गया तो गाड़ी का संतुलन बिगड़ जाता है ठीक उसी तरह से ही पति-पत्नी में से अगर एक भी अपने साथी की भावनाओं का ध्यान नहीं रख पा रहा है, तो फिर इस प्यार भरे संबंध में दरार आते देर नहीं लगती है।

जिम्मेदारियों का बंटवारा

आजकल पति-पत्नी दोनों ही वर्किंग हैं ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि जिस तरह से दोनों मिल-जुलकर आर्थिक जिम्मेदारियों को निबाहते हैं उसी तरह से घरेलू काम में भी एकदूसरे का साथ दें। अगर पत्नी वर्किंग ना भी हो तो भी घर में इतने काम होते हैं कि वह थक जाती है ऐसे में अगर आप उसकी थोड़ी सी मदद कर दें, तो उसके मन में आपके प्यार की डोर और ज्यादा मजबूत होगी। आमतौर पर लोगों की यह धारणा होती है कि घर का काम करने का जिम्मा सिर्फ औरत का है, तो यह कतई जरूरी नहीं है कि घर का सारा काम केवल पत्नी ही करे। अगर पत्नी खाना बना रही है, तो कम से कम आप अपने बच्चों का होमवर्क तो करवा ही सकते हैं। इसी तरह से बाजार से सब्जी लाने का जिम्मा या फिर कमरे में बिखरी चीजों को ठीक करना आदि जैसे छोटे-छोटे काम करके आप अपने संबंधों को प्रगाढ़ बना सकते हैं। आपकी ये छोटी-सी पहल आपकी पत्नी के मन में प्यार के साथ-साथ आपके प्रति सम्मान भी बनायेगी। यकीन मानिये इस बात पर अमल करके आप अपनी पत्नी के दिल के और ज्यादा करीब होते जायेंगे।

पसंद ना पसंद का रखें ध्यान

प्यार भरे संबंधों के लिए यह बेहद जरूरी है कि आप अपने साथी की पसंद ना पसंद का ध्यान रखें। अगर उसे आपकी कोई बात अच्छी नहीं लगती है, तो उसे बदलने की कोशिश करें। इसी तरह से इस बात का ख्याल रखें कि ऐसी कौन-सी बातें हैं, जिनके जिक्र मात्र से आपके जीवन-साथी के चेहरे पर मुस्कान छा जाती है और कौन-सी ऐसी बातें हैं जिनका जिक्र उसे पसंदनहीं हैं। इन सारी बातों के अलावा आपके साथी को क्या खाना पसंद है उसका पंसदीदा रंग कौन-सा है जैसी छोटी-छोटी बातें आप दोनों के प्यार को और बढ़ायेंगी।

एकदूसरे के परिवार का सम्मान

अगर आप यह चाहते हैं कि आपका साथी आपको प्यार करे और आपकी बात को मान दे, तो इसके लिए यह बेहद जरूरी है कि आप अपने जीवन-साथी से जुड़े सारे संबंधों को खुले दिल से स्वीकार करें उसके परिवार के सदस्यों का सम्मान करें। जब आप अपने जीवन-साथी के माता-पिता को अपने माता-पिता की तरह मान देंगे और उसके भाई-बहनों को अपने भाई बहन की तरह प्यार करेंगे, तो यकीनन आपके संबंधों में प्रगाढ़ता आयेगी।

छोटी-छोटी बातों पर ना टकरायें

यह सच है कि जहां प्यार होता है वहां टकराव भी होता है एक गाना भी है तुम रूठी रहो मैं मनाता रहूूं... थोड़ी बहुत नोंक-झोंक प्यार को बढ़ाती है, लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा बढ़ जाये तो फिर संबंधों में खटास आते देर नहीं लगती। इसलिए अपने जीवन-साथी के साथ बातचीत करते समय इस बात का ध्यान रखें की आप जो भी बात कहें उससे उनका ईगो ना हर्ट हो। एक बात और भी है जिस पर ध्यान देना जरूरी है वो यह कि अपनी बहस को झगड़े में ना बदलें अगर आप दोनों के बीच किसी बात को लेकर मनमुटाव हो भी गया हो, तो फिर उसे उसी दिन सुलझा लें कहने का मतलब यह है कि अपनी तकरार को लंबा ना खींचे, जितना जल्दी हो आपसी झगड़े को सुलझा लें।

विष्वास है बेहद जरूरी

पति-पत्नी के सबंध में एक सबसे महत्वपूर्ण बात है, जो दोनेां के संबध के बना भी देता है और बिगाड़ भी देता है वह है एकदूसरे पर भरोसा। सच तो यह है कि किसी भी संबंध को तभी अच्छी तरह से चलाया जा सकता है जब उसमें विश्वास हो बिना भरोसे के यह सबंध दिखावा मात्र रह जाता है। आज जब पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं दोनों काम पर जाते हैं ऐसे में उनके बीच एकदूसरे के कलीग्स को लेकर अनायास ही शक पैदा होने लगता हे। लेकिन अगर आप यह चाहते हैं कि आपका संबंध खुशियों भरा रहे इसके लिए यह जरूर है कि आप अपने साथी पर विश्वास करें।  सच तो यही है कि खुश रहने के लिए धन-दौलत की उतनी ज्यादा जरूरत नहीं होती है जितनी अपने साथी के साथ म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग और प्यार की। अपने जीवन साथी की छोटी-छोटी जरूरतों और खुशियों का ध्यान रखें और अपनी जिंदगी से सारे तनाव और फ्रस्टेशन को निकालकर सिर्फ अपने जीवन-साथी को प्यार करें और उसका तथा उससे जुड़ संबंधों का सम्मान करें फिर देखिये कैसे खुशियां आपके आंगन में हमेशा के लिए अपना घर बना लेंगी।

इन पर करें अमल


  • महत्वपूर्ण दिनों को याद रखें और उस पर अपने साथी को छोटा सा ही सही उपहार दें।
  • किसी दूसरे के सामने कभी भी अपने साथी के साथ बत्तमीजी से बात ना करें।
  • कभी-कभी एकदूसरे के साथ कहीं घूमने जायें
  • अगर आपके बच्चे हैं, तो उसका काम दोनों मिलजुलकर करें इससे ना केवल आप दोनों की जिम्मेदारियां बंटेंगी वरन बच्चे के साथ आप दोनों की बांडिंग भी बढ़ेगी।