ऐसा है प्यार तुम्हारा
घने दरख्तों की छांव सा है तुम्हारा प्यार
जिसमें शीतलता है
और
है चट्टान सी मजबूती
जिस के सहारे
उबर जाती हूं
मैं
हर उस बात से
जो
मुझे परेशान करती है
जीवन का हर तनाव
भूल जाती हूं मैं
तुम्हारी मधुर मुस्कान से
और
चल पड़ती हूं
अपनी मंजिल की ओर तुम्हारे कदम से कदम मिला
नापने को
धरती आकाश की दूरी...

1 comment:
"नापने को धरती आकाश की दूरी"
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