Saturday, May 2, 2015

ऐसा है प्यार तुम्हारा


घने दरख्तों की छांव सा है तुम्हारा प्यार
जिसमें शीतलता है
और
है चट्टान सी मजबूती
जिस के सहारे
उबर जाती हूं
मैं
हर उस बात से
जो
मुझे परेशान करती है
जीवन का हर तनाव
भूल जाती हूं मैं
तुम्हारी मधुर मुस्कान से
और
चल पड़ती हूं
अपनी मंजिल की ओर तुम्हारे कदम से कदम मिला
नापने को
धरती आकाश की दूरी...

1 comment:

Anonymous said...

"नापने को धरती आकाश की दूरी"